'बरगद का पेड़' - तेजस | पुस्तक समीक्षा
'बरगद का पेड़' - तेजस | पुस्तक समीक्षा

तेजस द्वारा लिखी गयी किताब ‘बरगद का पेड़’

‘बरगद का पेड़’ काव्य संग्रह के रचनाकार तेजस है। यह उनके द्वारा लिखी हुई पहली किताब है।

जब मुझे बरगद की पेड़ की समीक्षा करने के लिए लेखक तेजस ने कहा ,तो में काफ़ी ख़ुश हुई क्यूँकि ये मेरी पहली हिंदी किताब थी जिसकी में समीक्षा करने जा रही थी, साथ ही मन में काफ़ी अनिश्चिता भी थी की क्या में ये कर पाऊँगी?

सोचा नहीं था के किताब ‘बरगद के पेड़’ का अनुभव इतना अच्छा होगा। यह किताब लेखक तेजस द्वारा लिखी गयी ६५(65) सुंदर कविताओं का संग्रह है। लेखक ने शब्दों के ताने बाने बुनकर एक सुंदर दुनिया बनायी है। जिसके हर मोड़, हर गली और मोहल्ला एक नयी कहानी सुनाता है।

बहुत ही सहज और सरल शब्दों में अभिव्यक्ति दी है, लेखक तेजस ने। इन्होंने कविताओं में कही कही अंग्रेज़ी और उर्दू शब्दों का काफ़ी अछेसे प्रयोग किया है।

पुस्तक के शीर्षक को साकार करती रचनायें, मन के भावो को झकझोरदेती है। सभी कवितायें दिल को छू जाती है और मन को सहला जाती है।

इनमे से कुछ रचनायें जो मेरे मन को भा गयी: वीराने, छोटू, बरगद का पेड़, वक़्त दर्ज़ी हैं, पथर दोस्त मेरा, यादें, इंतज़ार, डाईरी इत्यादि…

तू बरस रही थी मुझपे बूँदो की तरह
वक़्त फिर लिख रहा था मुझपे अनजान किताब
तेरे लब छू रहे थे मुझको स्याही की तरह
सफ़हा-दर-सफ़हा बन रही थी वो अनजान किताब

‘बरगद का पेड़’ जैसी किताबें, हिंदी से दूर जा रहे पाठकों को खींच लाने और बांधे रखने में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

सभी रचनायें रंग बिरंगे गुलदस्ते की तरह है, मन को ख़ुश कर जाती है। काव्य संग्रह अपने आप में पूर्णतालिए हुए है।

रेटिंग: 5/5

 

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बरगद का पेड़
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